दिवाली पर निबंध | Diwali Essay In Hindi Language

आज का हमारा निबंध का विषय है दिवाली (diwali essay in hindi)। दिवाली जिसे हम दीपावली भी कहते हैं। यह भारत का बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण त्यौहार है। जिसे पूरा भारत देश पूरे हर्ष और उत्साह से हर साल मनाता है और आज हम इसी पर्व पर निबंध लिखेंगे।

यह निबंध class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 के विद्यार्थियों के लिए लिखे गए है। इन निबंध को कॉलेज के विद्यार्थी भी इस्तेमाल कर सकते है।


दिवाली पर निबंध | Diwali/Deepawali  Essay In Hindi


दिवाली जिसे हम दीपावली के नाम से भी जानते हैं। दिवाली को रोशनी का उत्सव भी कहा जाता है। दिवाली हिंदुओं का प्रमुख त्यौहार है। दिवाली को हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है।

दिवाली असत्य पर सत्य की विजय और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है। दिवाली को मनाने के पीछे एक धार्मिक कथा है। यह कथा भगवान राम की कथा है। भगवान राम श्री कृष्ण के ही अवतार है।

भगवान राम रावन का वद करने के बाद सीता माता और अपने छोटे भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। और इस दिन अयोध्या के लोगों ने उनका स्वागत करने के लिए अपने घरों को दीये लगाकर सजाया था।

उसी दिन को हम दिवाली के रूप में मनाते हैं। दीपावली के दिन रात को माता लक्ष्मी जो की धन कि देवी है उनकी पूजा की जाती है। इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा भी की जाती है।

लोगों की ऐसी मान्यता है कि दिवाली के दिन अगर आप कोई नयी वस्तु खरीदते हैं। तो आपके घर में लक्ष्मी माता का आगमन होता है। और यही कारण है कि दिवाली में हर कोई किसी ना किसी चीज की खरीदी करता है।

दिवाली के दिन बाजारों में काफी भीड़ हो जाती है। क्योंकि दिवाली के दिनों में सभी लोग और बच्चे कपड़े, पटाखे और मिठाईयां बाजार से खरीदते हैं। दिवाली के दिन सभी नए खरीदे हुए कपड़ों को पहनकर तैयार होते हैं।

दिवाली के दिनों में सभी लोग अपने घरों को रंग बिरंगी लाइट लगाकर सजाते हैं। दिवाली आने से पहले लोग अपने घर को साफ करते हैं और घरों पर नया रंग चढ़ाते हैं। दिवाली के दिन शाम में सभी अपने घर पर श्री लक्ष्मी माता की आराधना करते हैं।

इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा होने के बाद सभी अपने घरों से बाहर निकलकर पटाखे फोड़ते हैं। इस दिन सभी एक दूसरे को प्रसाद और उपहार बांटते हैं। दिवाली के इस पावन दिन सभी माता लक्ष्मी से धन और जीवन में खुशियों की मांग करते है।

अंधकार पर प्रकाश की विजय का यह त्यौहार लोगों के बीच प्रेम और स्नेहा लेकर आता है। दिवाली के इन दिनों सभी घरों में रंग बिरंगी रंगोलियां बनाई जाती है। इन दिनों सुबह 5:00 बजे उठकर दीपक जलाए जाते हैं।

और रात को पटाखों की आतिशबाजी की जाती है। बुराई पर अच्छाई की जीत का यह त्यौहार समाज में सदभावना, उल्लास, भाईचारे और आपसी प्रेम का संदेश फैलाता है। दिवाली के पहले दिन को धनतेरस या फिर धन त्रयोदशी कहते हैं।

इस दिन को लक्ष्मी माता की पूजा की जाती है। लोक लक्ष्मी माता को प्रसन्न करने के लिए अपने घर मैं उपस्थित धन को लक्ष्मी माता के आगे रखते हैं। दिवाली के दूसरे दिन को नारक चतुर्दशी या फिर उसे छोटी दीपावली भी कहते हैं।

इस दिन को इसलिए मनाते हैं क्योंकि इस दिन भगवान श्री कृष्णा ने राक्षस नरकासुर का वध किया था। छोटी दिवाली के दिन सुबह को काली माता की पूजा भी की जाती है। तीसरा दिन जोकि दिवाली का मुख्य दिन होता है।

इस दिन माता लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। यही वह दिन है जिस दिन सभी लोग अपने परिवारजनों और मित्रों में मिठाइयां और उपहार बांटकर पटाखों की आतिशबाजी करते हैं। दीवाली के चौथे दिन को गोवर्धन पूजा की जाती है।

दिवाली के इस चौथे दिन सभी लोग भगवान श्री कृष्णा की आराधना करते हैं। इसके बाद दिवाली के पांचवे दिन भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है। वैसे कहा जाए तो दिवाली त्योहारों का संग्रह है।

भाई दूज भाई और बहन के प्रेम के लिए समर्पित त्यौहार है। दिवाली भारत देश का एक प्रमुख सांस्कृतिक त्योहार है। दिवाली त्योहार को हिंदू, मुस्लिम, सीख, ईसाई और अन्य धर्म के लोग एक साथ मिलकर मनाते है।

यह हमारे देश की अनेकता में एकता को दर्शाता है। दिवाली के दिनों बच्चों से लेकर बड़ों तक में एक अलग ही उत्साह होता है।


Short Essay On Diwali In Hindi Language


दिवाली त्योहार को हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाता है। दिवाली हिंदुओं का एक बड़ा त्यौहार है जो कि उनका धार्मिक और सामाजिक पर्व है। दिवाली किस दिन भगवान श्री राम 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या वापस आए थे।

इस दिन अयोध्या के लोगों ने दिए जलाकर उनका स्वागत किया था। दीपावली का अर्थ है दीपों की कतार। दिवाली त्यौहार आने से पहले लोग अपने घर दार की साफ सफाई करते है।

इन दिनों बाजार में सबसे ज्यादा खरेदी और बिक्री की जाती है। दिवाली के दिनों में नए कपड़े और चीजों को खरीदते हैं। दिवाली के दिनों में सब लोग अपना घर साफ करते हैं जिस वजह से सभी तरफ सफाई दिखाई देती है।

इस दिन सभी अपने घर के साथ-साथ अपने ऑफिस, दुकान को भी साफ करते हैं। दिवाली के दिनों में लोग अपने घर और दफ्तर को सजाकर रखते हैं। दिवाली त्योहार पूरे 5 दिन तक चलता है।

दिवाली का पहला दिन धनतेरस का होता है। इस दिन रात को सभी के घरों में तेरह दिए जलाए जाते है। इस दिन गौ माता की भी पूजा की जाती है। दिवाली के दूसरे दिन लोग दिन निकलने से पहले उठकर स्नान करते हैं और फिर भगवान की पूजा करते हैं।

दिवाली का तीसरा दिन बहुत ही उत्साह से भरा हुआ दिन होता है। यह दिवाली का प्रमुख दिन होता है। इस दिन सभी के घर में सफाई और सजावट तथा दिए लगाकर रोशनी की जाती है।

इस दिन सभी के घरों में माता लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना की जाती है और फल मिठाई का प्रसाद चढ़ाया जाता है। इस दिन सभी लोग नए खरीदे हुए कपड़े पहनते हैं और पटाखे जलाकर आतिशबाजी का आनंद उठाते हैं।

इस दिन सभी व्यापारी नए बही खातों की पूजा करते हैं। दिवाली के चौथे दिन गोवर्धन की पूजा की जाती है। और उसके अगले दिन भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है। भाई दूज दिवाली के पांचवें दिन को मनाया जाता है।

यह भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। इस दिन सभी बहने अपने भाई की आरती उतारती है। उसे अच्छा खाना खिला कर उपहार देती है। दिवाली के इन 5 दिनों में जितने भी त्योहार आते हैं उन्हें सभी लोग मिलजुल कर मनाते हैं।

दिवाली त्योहार आपसी मेलजोल बढ़ाने का वैभवशाली त्यौहार है। इस त्यौहार का और एक फायदा यह भी है कि सभी तरफ साफ-सफाई की जाती है और हमारा परिसर स्वच्छ रहता है। दिवाली के दिनों में सभी के मन के गिले-शिकवे दूर हो जाते हैं।


Paragraph On Diwali In Hindi


दिवाली भारत देश का सबसे बड़ा त्यौहार है। इस त्यौहार को सभी धर्म के लोग मनाते हैं। इस त्यौहार में दीपों का खास महत्व है जिस वजह से इस त्यौहार को दीपावली या फिर दिवाली के नाम से जाना जाता है।

दीपावली का अर्थ होता है दीपो की पंक्ति। दिवाली त्योहार जिसे प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाता है। यह अंधेरी रात को असंख्य दीपों की रोशनी से प्रकाशमय कर देता है।

भारत में मनाए जाने वाले सभी त्योहारों में से दीवाली त्योहार का सामाजिक और धार्मिक दोनों दुष्टी से अत्यधिक महत्व है। दिवाली को दीपोत्सव भी कहा जाता है। दिवाली के दिन माना जाता है कि राजा श्री राम चंद्र अपने 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटे थे।

इस दिन सभी अयोध्यावासी काफी खुश थे। इस दिन पूरे अयोध्या में श्रीराम का स्वागत करने के लिए लोगों ने घी के दिए जलाए थे। उस दिन कार्तिक मास की अमावस्या की रात थी। जिसे अयोध्या के असंख्य दियो के रोशनी ने जग मगा दिया था।

उसी दिन से आज तक भारत में प्रतिवर्ष दिवाली के इस प्रकाश पर्व को बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। भारत का यह त्यौहार प्रत्येक वर्ष अक्टूबर या फिर नवंबर के महीने में आता है।

दिवाली अंधेरे से रोशनी में जाने का एक प्रतीक है। यह त्यौहार सत्य की जीत का और झूठ के नाश का प्रतीक है। दीपावली में पूरे भारत में स्वच्छता की जाती है। दिवाली की तैयारी कई सप्ताह पहले शुरू की जाती है।

इस त्यौहार के आने से पहले लोग अपने घरों दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। इन दिनों सभी के घर मैं सजावट का कार्य किया जाता है। कोई अपने घर को नया रंग लगाता है तो कोई अपने घर की मरम्मत कराता है।

दिवाली के दिनों में सभी के घर साफ-सुथरे और सजे से नजर आते हैं। दीपावली कोई एक दिन का पर्व नहीं है। दीपावली अनेक पर्व का समूह है। दिवाली का मुख्य दिन दिवाली के तीसरे दिन होता है।

दिवाली के पहले दिन धनतेरस का त्यौहार आता है। इस दिन बाजारों में खासतौर पर बर्तनों की दुकानों पर विशेष साज सज्जा और भीड़ दिखाई देती है। धनतेरस के दिन बर्तन खरीदना काफी शुभ माना जाता है।

इस दिन प्रत्येक परिवार में उनकी आवश्यकता के अनुसार कुछ ना कुछ खरीदारी की जाती है। दिवाली के दूसरे दिन नारक चतुर्दशी का त्यौहार होता है जिसे छोटी दीपावली भी कहा जाता है।

इस दिन यम पूजा हेतु दीपक जलाए जाते हैं। दीपावली के तीसरे दिन को लक्ष्मी पूजन किया जाता है। यह दीपावली का प्रमुख दिन है। इस दिन घर में सुबह से ही तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं।

इस दिन बाजार में तरह-तरह की मिठाइयां और लक्ष्मी माता और भगवान गणेश की मूर्तियां बेची जाती है। जगह जगह पर पटाखों की दुकानें सजी होती है। दीपावली के इस दिन सभी लोग अपने रिश्तेदारों और सगे संबंधियों के घर जाकर मिठाइयां और उपहार बांटते है।

इस दिन शाम को माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की जाती है। पूजा होने के बाद सभी लोग अपने घरों से बाहर निकलकर पटाखे चलाते हैं। इस दिन जो आतिशबाजी होती हैं उसे देखना काफी खूबसूरत लम्हा होता है।

इस दिन पूरे भारत में इतनी रोशनी होती है की अमावस्या की रात भी पूर्णिमा के रात से ज्यादा प्रकाश युक्त दिखाई पड़ती है।


तो दोस्तों यह थे दिवाली पर निबंध (Diwali Essay In Hindi)। यह निबंध आपको कैसे लगे यह आप हमे कमेंट के माध्यम से बता सकते है। आज के इस लेख में हमने दिवाली पर छोटा निबंध (short essay on diwali in hindi) भी लिखा है। आशा करता हु आपको यह निबंध पसंद आया होगा।

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