भगत सिंह की जानकारी, जीवनी और निबंध

दोस्त आज हम ऐसे स्वतंत्रता सेनानी के बारे में जानेंगे जिन्होंने हमारे भारत देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए अपनी जान दे दी। आज हम इस लेख में भगत सिंह की जानकारी (bhagat singh information in hindi) जानेंगे।

इस जानकारी को आप अपने स्कूल या कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इस जानकारी के बलबूते आप भगत सिंह पर निबंध (bhagat singh essay in hindi) लिख सकते हैं। या फिर आप भगत सिंह की जीवनी (bhagat singh biography in hindi) के बारे में भी लिख सकते हैं। आपको इस लेख में उनकी सारी जानकारी मिल जाएगी।


Bhagat Singh : Information, Biography And Essay In Hindi


भारत का स्वतंत्रता संग्राम दो तरह के विचार पर आधारित था। पहला था महात्मा गांधी जी की तरफ अहिंसा के नीति का तरीका और दूसरा था और अतिवादी तरीके से। अतिवादी तरीके के बीज १८५७ के स्वतंत्रता संग्राम में बोए गए थे।

जिस वक्त कांग्रेस पार्टी ने स्वतंत्रता संग्राम को शुरू किया उस समय क्रांतिकारियों की एक नई पीढ़ी तैयार हुई और उनके प्रतिनिधि थे भगत सिंह। इससे कई लोगों ने क्रांतिकारियों से प्रेरणा ली और स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के विचार से उत्साहित हुए।

भगत सिंह का पूरा परिवार स्वतंत्रता संग्राम में शामिल था। जिस वक़्त भगत सिंह का जन्म हुआ उस समय उनके पिता किशन सिंह को राष्ट्रवादी गतिविधियों के लिए जेल में डाल दिया गया था।

भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह इनको ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों के लिए पहले ही निर्वासित कर दिया गया था। भगत सिंह का जन्म सितंबर 190७ में हुआ था। उनका जन्म लायलपुर जिले के बंगा गांव में हुआ था जो कि आज पाकिस्तान में है।

भगत सिंह जी के पिता को उनके नवजात बच्चे को देखने के लिए कुछ दिनों के लिए जेल से रिहा कर दिया गया था। भगत सिंह जी की शुरुआती शिक्षा गांव में हुई थी और उसके बाद उन्हें लाहौर भेज दिया गया था। जब १९२१ में असहयोग आंदोलन शुरू किया गया तो उन्हें नेशनल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।

जहां पर पंजाब केसरी लाला लाजपत राय, भाई परमानंद और अन्य देशभक्त नेताओं ने पढ़ाया। जब गांधी जी ने छात्रों को सरकारी सेवाओं का बहिष्कार करने के लिए कहा था तब गांधीजी के आग्रह पर कई छात्रो ने सरकारी कॉलेज छोड़ दिए।

भगत सिंह के सहभागियों में से एक सुखदेव थे। जो कि बाद में मुंबई की घटना में सह अभियुक्त में थे और उनके साथ उन्हें फांसी दी गई थी। भगत सिंह जी के माता पिता ने, जब भगत सिंह कॉलेज में थे तो उनकी शादी करने का फैसला किया।

लेकिन भगत सिंह वहा से दिल्ली को भाग कर चले गए। और उन्होंने अपने माता-पिता के लिए पीछे एक चिट्ठी छोड़ते हुए कहा “कि वह इसलिए भागे है क्योंकि वह शादी नहीं करना चाहते और उन्हें उनकी चिंता करने की जरूरत नहीं है”।

भगत सिंह जी ने दिल्ली में दैनिक अर्जुन मैं एक संवाददाता के रूप में भी काम किया। उसके कुछ दिन बाद उन्होंने गणेश विद्यार्थी द्वारा प्रकाशित दैनिक प्रताप के लिए काम किया जो कि कानपुर में था।

यही वह जगह थी जहां उनका परिचय बटुकेश्वर दत्त से हुआ। उस दिनों कानपुर में गंगा और यमुना नदियों ने काफी बर्बादी की थी। और उस बर्बादी में जो पीड़ित लोग थे उनकी सेवा के लिए इन युवकों ने हाथ मिलाया था।

यहीं पर भगत सिंह की मुलाकात चंद्रशेखर आजाद से हुई। भगत सिंह को लगता था कि देश को क्रांति के माध्यम से ही स्वतंत्रता प्राप्त की जा सकती है। और यही वजह थी कि उन्होंने १९२४ में नौजवान भारत सभा की स्थापना की।

भगत सिंह, सुखदेव और भगवतीचरण ने अपने खून से घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। भगत सिंह ने युवा सदस्यों की इच्छा शक्ति का परीक्षण करने के लिए अपने हाथ को मोमबत्ती के ऊपर २० मिनट तक रखा।

इस वजह से उनका हाथ का मांस पूरी तरह से जल गया और उनके हमवतन लोगों को जबरदस्ती उनका हाथ मोमबत्ती से हटाना पड़ा। भारत के लोगों ने साइमन कमीशन का विरोध किया। जब वह भारत वापस आया तो उसे काले झंडे मिले।

शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का एक बैंड जिन्होंने लाहौर में प्रदर्शन किया था उन्हें निर्दयता से मारा गया। इस लाठीचार्ज में लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हो चुके थे।

लाला लाजपत राय ने कुछ दिनों बाद अपना दम तोड़ दिया। वह इस स्वतंत्रता के अभियान में शहीद हो गए। लाला लाजपत राय को जिस अंग्रेज अधिकारी ने चोट पहुंचाई थी उस अंग्रेज अधिकारी saunders की हत्या भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने कर दी।

उसके बाद जब १९३० में सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक पेश किया जा रहा था। तो भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली विधानसभा में बम फेंके। इस विधेयक में हड़ताल करने के लिए श्रमिकों के अधिकारों को समाप्त करने का प्रस्ताव था।

भगत सिंह और दत्त ने इंकलाब जिंदाबाद और गिरफ्तारी के नारे लगाए। भगत सिंह और बाकीओ के ऊपर कई अपराधों के आरोप लगाए गए थे। भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु पर लाहौर बम घटना, saunders की हत्या, और विधानसभा में बम विस्फोट के मामले के आरोप लगाए गए थे और वह उस में दोषी भी पाए गए।

दोषी पाए जाने के बाद उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी। जेल में भगत सिंह और उनके कई सहयोगी जेल के अंदर अच्छी स्थिति की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गए।

भगत सिंह जी ने इसके लिए ११५ दिनों तक का उपवास किया लेकिन भूख हड़ताल के ६३ वे दिन यतींद्र दास जी का निधन हो गया। इस बड़े पैमाने पर किए गए आंदोलन ने आखिरकार सरकार को अपनी मांगों को मानने के लिए मजबूर करा दिया।

मार्च १९३१ के २३ तारीख को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को एक साथ फांसी दे दी गई। फांसी के वक्त तीनों देश भक्तों ने अपने राष्ट्रीय गीत का गुणगान करते हुए मृत्यु को अपना लिया। और भगतसिंह जैसे क्रांतिकारी देश को स्वतंत्रता दिलाने के इस लड़ाई में शहीद हो गए।


तो दोस्तों यह थे भगत सिंह जिन्होंने अपने देश के लिए अपनी जान दे दी। दोस्तों आज के इस लेख में हमने भगत सिंह के बारे में पूरी जानकारी (bhagat singh information in hindi) हासिल की। आप चाहे तो इस जानकारी को भगत सिंह के निबंध (bhagat singh essay in hindi) के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। या फिर आप इस जानकारी का इस्तेमाल करके भगत सिंह की जीवनी (bhagat singh biography in hindi) के बारे में लिख सकते हैं और इस जानकारी को दूसरों के साथ शेयर करना ना भूले।

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