Short Essay On My School In Hindi Language | मेरा विद्यालय पर निबंध

आज के हमारे निबंध का विषय है मेरा विद्यालय (my school)। दोस्तों हम सब बचपन में स्कूल जाना शुरू करते हैं और ज्ञान की प्राप्ति करते हैं। ऐसे में हमारे पास कुछ स्कूल की ऐसी यादें बन जाती है। जो हम कभी नहीं भूल सकते और आज हम उन्हीं यादों को ताजा करेंगे मेरा विद्यालय पर निबंध (short essay on my school in Hindi language) लिखकर।


मेरा विद्यालय पर निबंध | Short Essay On My School In Hindi Language


स्कूल का महत्व ( Importance Of School )

स्कूल हमारे जीवन का बहुत ही महत्वपूर्ण भाग होता है। स्कूल से हमें बहुत सी बातें सीखने और जानने को मिलती है। अगर आपको स्कूल जाना पसंद नहीं है तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है। स्कूल एक विद्या मंदिर है जहां पर ञान का भंडार होता है।

स्कूल में सीखने वाले बच्चों में कोई कम ज्ञान अर्पित कर पाता है तो कोई ज्यादा। विद्यालय में हम वह बातें सीखते हैं जो हम कहीं और नहीं सीख सकते। क्योंकि बिना ज्ञान के हम अपने जीवन के अच्छे और बुरे वक्त में सही फैसला नहीं कर सकते और इसी वजह से हर किसी को शिक्षा का महत्व समझना चाहिए।

स्कूल जाने से बच्चों में वह बातें विकसित होती है जो उन्हें उनके भविष्य में मदद करती है। जिसमें से पहली बात है जिज्ञासा। जब बच्चा विद्यालय में जाता है तो उसे बहुत सी बातें भी पता चलती है। जिसमें उसकी रुचि बढ़ जाती है और वही जिज्ञासा उसे ज्ञान अर्पित करने में मदद करती है।

स्कूल में जाने से बच्चों की सोचने और समस्या का समाधान ढूंढने की क्षमता बढ़ जाती है। जो उन्हें भविष्य में आने वाले कठिनाइयों से लड़ने में मदद करती है। विद्यालय में होने वाले विभिन्न कार्यक्रम से हमें भविष्य में होने वाले नेता मिलते हैं जो हमारे भारत देश का नेतृत्व करें और देश को आगे ले जा सके।

वैसे तो स्कूल में जाने के और भी कहीं फायदे हैं जिनमें शामिल है अच्छी और प्रभावी मौखिक और लिखित संचार, जानकारी का सही विश्लेषण करना इत्यादि। यह तो हो गई बात विद्यालय के महत्व की अब में मेरे विद्यालय के बारे में बताऊंगा।

मेरा विद्यालय ( My School )

मेरा नाम राहुल है और मैं महाराष्ट्र का रहने वाला हूं। मेरा स्कूल मेरे घर से करीबन 2 किलोमीटर की दूरी पर है। मैं मेरे स्कूल में सुबह 10:00 बजे चला जाता हूं। मुझे मेरे स्कूल में ले जाने के लिए स्कूल बस आती है। जिसमें और भी कहीं स्कूल जाने वाले बच्चे होते हैं।

हमारे स्कूल बस के ड्राइवर अंकल बहुत ही अच्छे हैं। अगर कभी मैं लेट होता हूं तो वह मेरे लिए मेरे घर के सामने रुक जाते हैं। अगर कभी मैं बहुत लेट हो गया तो मेरे पापा मुझे मेरे स्कूल में छोड़ देते हैं।

मेरे विद्यालय का नाम है जिला परिषद रायपुर है, यह एक सरकारी स्कूल है। हमारे स्कूल में कक्षा 1 से लेकर कक्षा 10th तक के पढ़ाया जाता है। मेरे विद्यालय में कुल मिलाकर 15 शिक्षक और 10 बाकी कार्य करता है।

मेरे विद्यालय में संगणक कक्षा भी है। जहां हमें कंप्यूटर के बारे में सिखाया जाता है। मेरे स्कूल में खेलने के लिए बड़ा मैदान है। जहां पर हम सब दोस्त मिलकर अलग अलग खेल खेलते हैं।

जब मैं मेरे स्कूल में जाता हूं तो सबसे पहले हमारे स्कूल के मैदान में सभी स्कूल के विद्यार्थी मिलकर राष्ट्र गीत गाते हैं। और उसके बाद हम सब अपने अपने कक्षा में जाकर बैठ जाते हैं।

पहला विषय हमें हमारे वर्ग शिक्षक पढ़ाते हैं। पढ़ने से पहले वह सभी बच्चों की अटेंडेंस (गिनती) लेते हैं। मेरे विद्यालय में हमें 2:00 बजे बाद 1 घंटे की छुट्टी दी जाती है ताकि हम खाना खा सके। हमारे स्कूल में हमें हर दिन स्कूल की तरफ से खाना दिया जाता है ताकि कोई भी विद्यार्थी भूखा ना रहे। खाना खाकर होने पर हम मैदान में अपने दोस्तों के साथ खूब खेल खेलते हैं और फिर से पढ़ाई करने जुड़ जाते हैं।

और आखिर शाम 5:00 बजे मुझे मेरे स्कूल से छुट्टी हो जाती है। छुट्टी होने पर हम प्रार्थना करते हैं और स्कूल बस से घर को वापस रवाना हो जाते हैं। मुझे मेरा स्कूल बहुत पसंद है। हम सबको अपने विद्यालय में जाकर ज्ञान अर्पित करना चाहिए और अपने माता पिता का नाम को ऊंचा करना चाहिए।


Short Essay On My School In Hindi Language


मेरे विद्यालय का नाम संत शिवराम विद्यालय है। मेरा विद्यालय बहुत ही सुंदर है। मेरा विद्यालय मेरे घर से कुछ ही दूरी पर है। मेरे विद्यालय में पहली कक्षा से लेकर दसवीं कक्षा तक के पढ़ाई दी जाती है।

मेरे विद्यालय का भवन तीन मंजिला है। मेरे विद्यालय के कक्षा के सभी कमरे फर्नीचर पंखे आदि से सुसज्जित और हवादार है। मेरे विद्यालय में शिक्षा कूद तथा अन्य शिक्षेतर गतिविधियों की उत्तम व्यवस्था की गई है।

विद्यालय का वातावरण काफी शांत और पढ़ाई करने के लिए बिल्कुल सही है। मेरे विद्यालय में लगभग 800 विद्यार्थि पढ़ते हैं।मेरे विद्यालय के सभी विद्यार्थी नियमित रूप से विद्यालय में आते हैं। मेरे विद्यालय का समय सुबह 11:00 बजे से 5:00 बजे तक रहता है।

हमारे विद्यालय में कई विद्यार्थी आस-पास के गांव से भी आते हैं और उनके लिए उन्हें लाने और वापस ले जाने के लिए स्कूल बस का इंतजाम भी किया गया है।

हमारे विद्यालय के सभी विद्यार्थियों शिक्षकों के प्रति काफी आदर भाव रखते हैं। मेरे विद्यालय के शिक्षक किसी भी विद्यार्थियों पर कभी भी गुस्सा नहीं करते। और अगर कभी गुस्सा कर भी देते हैं तो वह हमारे अच्छी के लिए होता है।

हमारे विद्यालय के सभी शिक्षक बहुत लगन से हमें पढ़ाते हैं। हमारे विद्यालय के सामने एक खेल का मैदान भी है जो काफी बड़ा है। इस मैदान पर हम सब मिलकर हर दिन नए नए खेल खेलते हैं।

साथी हमारे विद्यालय के अध्यापक भी हमें विभिन्न प्रकार के खेल सिखाते हैं। इससे हमें नए नए खेल खेलने का आनंद मिलता है और साथ ही नए खेल के बारे में जानकारी भी प्राप्त होती है।

हम हमारे विद्यालय में कबड्डी, खो-खो, क्रिकेट,इत्यादि प्रकार के खेल का आनंद लेते हैं। मेरे विद्यालय में गरीब विद्यार्थियों के लिए विद्यालय की पोशाक मुफ्त में दी जाती है। हमारे स्कूल में प्रजासत्ताक दिवस व स्वतंत्रता दिवस पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।

इस दिन निबंध लेखन आशा और देश भक्ति पर गानों का आयोजन किया जाता है। हमारे विद्यालय में सभी विद्यार्थियों को नए-नए उपक्रमों में शामिल होने का मौका दिया जाता है।

आजकल तकनीकी शिक्षा का महत्व बढ़ गया है। इसलिए हमारे विद्यालय में तकनीकी शिक्षा के रूप में कंप्यूटर सिखाने पर पूरा जोर दिया जाता है।

इससे उन गरीब बच्चों को भी कंप्यूटर का ज्ञान मिलता है जो कंप्यूटर खरीद नहीं सकते। हमारे विद्यालय में बड़ों का सम्मान करना और गरीबों की मदद करना भूखे को खाना देना यह अमूल्य विचार भी सिखाए जाते हैं।

पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ऐसे जनजागृति के कार्यक्रम का भी आयोजन हमारे स्कूल में किया जाता है। मेरा स्कूल एक आदर्श और सुंदर विद्यालय है। एक अच्छा विद्यालय और एक अच्छा शिक्षक ही विद्यार्थी को एक अच्छा नागरिक बनाता है।


Paragraph On My School In Hindi


मेरे विद्यालय का नाम श्री स्वामी विवेकानंद विद्या मंदिर है। मेरा विद्यालय एक आदर्श विद्यालय है। यहां शिक्षा खेलकूद तथा अन्य शिक्षेटर गतिविधियों की उत्तम व्यवस्था की गई है। मेरे विद्यालय का वातावरण काफी शांत और बिल्कुल वैसा है जैसा किसी स्कूल का होना चाहिए।

मेरे विद्यालय में पहली से लेकर दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई की जाती है। और प्रत्येक कक्षा में दो या तीन अनुभाग है। विद्यालय का भवन चार मंजिला है। इसमें लगभग 80 कमरे हैं। हमारे विद्यालय के सभी कक्षाओं में अच्छे फर्नीचर और पंखे लगाए गए हैं।

इसके अलावा स्टाफ रूम, पुस्तकालय कक्ष, हॉल, कंप्यूटर कक्षा, परीक्षा का कक्षा आदि सभी प्रकार की उत्तम व्यवस्था से युक्त है।

मेरे विद्यालय में पीने के पानी और शौचालय का भी उत्तम प्रबंध किया गया है। मेरे विद्यालय में लगभग 1000 विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। मेरे विद्यालय में कुल मिलाकर 50 अध्यापक है। इनके अलावा मेरे विद्यालय में 15 अतिरिक्त कर्मचारी है। इनमें 5 क्लर्क और 5 चपरासी है।

शिक्षा के मामले में मेरा विद्यालय मेरे गांव में सबसे अच्छा है। मेरे विद्यालय से सभी विद्यार्थी अच्छे अंकों के साथ पास होते हैं और हमारे शिक्षक हमें अच्छा मार्गदर्शन करते हैं। जैसा कि मैंने कहा कि हमारे विद्यालय में कंप्यूटर का भी कक्ष है। हमें उस कक्ष में हर दिन कंप्यूटर सिखाया जाता है।

मेरे विद्यालय में पढ़ाई के साथ साथ खेल कूद को भी महत्व दिया जाता है। हमारे शिक्षक हमें नए नए खेल सिखाते हैं जैसे क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन, खो खो, कबड्डी और आदि खेलों को खेलने की सही जानकारी प्रदान करते हैं।

मेरे विद्यालय में एक बड़ा पुस्तकालय है। जहां सभी विषयों पर पुस्तके मिल जाती है। इस पुस्तकालय में पाठ्य पुस्तकों के अलावा कहानियों कविताओं तथा ज्ञान विद्न्यान के संबंधित पुस्तकों का अच्छा संग्रह है।

मेरे विद्यालय के मैदान में काफी पेड़ पौधे लगाए गए हैं। विद्यालय में हमारे शिक्षक हमें बताते हैं कि पेड़ पौधे हमारे लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। वह क्यों हमें पेड़ पौधे लगाने चाहिए। हम हमारे विद्यालय के सभी पेड़ पौधों का पूरा ख्याल रखते हैं।

हमारे विद्यालय में हर वर्ष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है। मेरे स्कूल के सभी विद्यार्थी इन कार्यक्रमों में बड़े ही उत्साह के साथ हिस्सा लेते है।

मेरा विद्यालय मेरे लिए एक वरदान है जहां मुझे इतने अच्छे शिक्षक और कार्यकर्ता मिले। जिनकी वजह से हमें अच्छी शिक्षा मिलती है। मुझे मेरे विद्यालय पर पूरा गर्व है।


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