होली पर निबंध | Holi Essay In Hindi Language

दोस्तों, आज हम होली के ऊपर निबंध (Holi essay in Hindi) लिखेंगे। आज हम class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 के विद्यार्थियों के लिए निबंध लिखेंगे। यहां हमने पूरे 6 निबंध लिखे हैं जिसमें आपको 200 शब्द से लेकर 800 शब्द तक कि निबंध मिलेंगे।

आप अपने हिसाब से जितने शब्द का निबंध लिखना चाहते हैं उतना लिख सकते हैं। हमने यहां अलग-अलग तरह से निबंध को लिखा है। तो आप इनमें से जो भी निबंध पसंद आता हो उसे लिख सकते हैं।


Holi Information In Hindi


प्रस्तावना

होली भारत का महत्वपूर्ण त्यौहार है। जिसे हर साल भारत के लोग बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। होली रंगों का त्योहार है। भारत में होली को फाल्गुन के महीने में मनाया जाता है। होली यह हिंदुओं का त्यौहार है लेकिन इस त्यौहार को हर धर्म के लोग मनाते हैं।

बच्चों के लिए होली का यह त्यौहार बहुत महत्व रखता है। होली का त्यौहार आते ही सभी के चेहरों पर मुस्कान सी आ जाती है। भारत में हर साल कई त्यौहार मनाए जाते हैं। और उन्हीं त्योहारों में से एक होली है। जिसकी अपनी ही एक पहचान है।

होली भारत का सबसे प्राचीन त्यौहार है। जिसे हजारों साल से मनाया जा रहा है। होली को द्वापर युग में भी मनाया जाता था। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण को भी होली खेलना पसंद था। होली एक ऐसा त्यौहार है जिसे बुराई पर अच्छाई के जित का प्रतीक माना जाता है।

होली रंगों, दोस्ती और खुशियों का त्यौहार है। होली एकमात्र ऐसा त्यौहार है जिसे मनाने के लिए विदेशों से पर्यटक आते हैं।

होली को कब मनाया जाता है ?

होली का त्योहार भारत में हर वर्ष फाल्गुन के महीने में मनाया जाता है। हिन्दुओ में होली को प्रत्येक वर्ष मार्च के महीने में मनाया जाता है।

होली क्यों मनाते हैं ? (Story Of Holi)

जैसा कि हम जानते हैं की होली बुराई पर अच्छाई के जीत का प्रतीक माना जाता है। तो इसे मनाने के पीछे एक प्राचीन पौराणिक कथा जुड़ी है।

प्राचीन काल में एक राजा था जिसका नाम हिरण्यकश्यप था। यह राजा ब्रह्मा की तपस्या करके वरदान पाकर इतना बलशाली हो चुका था, कि उसने मृत्यु लोक पर भी विजय पा ली थी। हिरण्यकश्यप को वरदान था कि ना उसे दिन में, ना रात में मारा जा सकता है। ना उसे कोई देवता, मनुष्य ना ही कोई जानवर और ना ही कोई हथियार मार गिरा सकता है।

इस वरदान के होने से हिरण्यकश्यप को अपनी शक्ति पर अहंकार हो गया था। वो खुद को भगवान समझ ने लगा था और सभी साधु संतो को भगवान की पूजा करने से रोक कर उन्हें खुद को पूजने को कहता था।

कुछ दिन बाद उसे एक बेटा हुआ जिसका नाम प्रह्लाद था। वह विष्णु भगवान का बहुत बड़ा भक्त था। और दूसरी तरफ हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु का विरोधी था। ऐसे में हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे को बहुत समझाया कि वह भगवान विष्णु की आराधना करना छोड़ दें और अपने पिता को पूजना शुरू करें।

लेकिन प्रह्लाद भगवान विष्णु की भक्ति करना नहीं छोड़ रहा था। यह देखते हुए हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने का बहुत प्रयास किया। लेकिन वह प्रह्लाद को मारने में असफल रहा। इस बार वह अपने बहन से मदद मांगने गया। हिरण्यकश्यप को होलीका नाम की एक बहन थी।

जो एक राक्षसी थी जिसे वरदान प्राप्त था कि उसे अग्नि से कोई हानि नहीं होगी। हिरण्यकश्यप ने अपने बहन से कहा कि वह प्रह्लाद को अपने गोद में बिठाकर अग्नी में बैठ जाए। और इसके लिए होलीका मान गई। प्रह्लाद को मारने के लिए होलीका प्रह्लाद को लेकर अग्नि मैं बैठ गई।

लेकिन भगवान विष्णु के आशीर्वाद होते हुए प्रह्लाद को क्या हो सकता था। अग्नि से प्रह्लाद को कोई हानि नहीं हुई बल्कि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका खुद ही उस आग में जलकर खाक हो गई। और उसी दिन से पूरे भारतवर्ष में होली को मनाया जाने लगा।

होली कैसे मनाते हैं ?

होली एक ऐसा त्यौहार है जिसे पारंपरिक तौर पर 2 दिन मनाया जाता है। होली के पहले दिन होलिका दहन किया जाता है। और दूसरे दिन बच्चे और बड़े सब रंगों के साथ खेलते हैं, जिस दिन को धुलेंडी कहते हैं।

होलिका दहन

होलिका दहन के दिन सभी लोग रात में होने वाले होलिका दहन के लिए लकड़ीओ को जमा करते हैं। ताकि रात को होलीका दहन किया जा सके।

रात होते ही लोग होलिका जलाते हैं और घर की महिलाएं होलिका जलाने से पहले होली की पूजा करते हैं। होलीका जलने के बाद सभी लोग होलीका की परिक्रमा करते हैं। होलिका का जलना बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

होलिका दहन होने के बाद लोक अपने अपने घर जाकर दूसरे दिन होने वाले होली के जश्न की तैयारी करते हैं।

रंगपंचमी

यह दिन बच्चों के लिए काफी मजेदार दिन होता है। इस दिन सभी बच्चे और बड़े अपने मन के मनमुटाव भुलाकर एक दूसरे को रंग लगाते हैं। इस दिन सभी बच्चे पिचकारी में रंग भर कर एक दूसरे पर पिचकारी से रंग उड़ाते हैं। साथ ही में बच्चे गुब्बारों का इस्तेमाल करते हैं। सभी एक दूसरे को गुलाल लगाकर भाईचारा बढ़ाते हैं।

इंदौर और महाराष्ट्र में कई जगह पर गांव में वाटर टैंक को हाय प्रेशर जेट के साथ घुमाया जाता है। और रोड पर जितने भी लोग मिलते हैं उन्हें हाई प्रेशर कैनन का इस्तेमाल करके रंग से रंग दिया जाता है। इस दिन कहीं लोग भांग और alcohol का इस्तेमाल करते हैं।

होली के दूसरे दिन के रंगपंचमी का यह त्यौहार दोपहर तक खेला जाता है। उसके बाद सभी लोग और बच्चे अपने अपने घर जाकर नहा धोकर नए कपड़े पहनते हैं। कहीं जगह नहाने के लिए होली के जली लकड़ी पर नहाने का पानी गर्म करते हैं।

और इस दिन शाम को लोग एक दूसरे के घर जाकर गले मिलते हैं और खुशियों को एक दूसरे के साथ बांटते हैं। इस दिन सभी घरों में अच्छे-अच्छे स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं और होली को मनाया जाता है।


होली पर निबंध


होली त्यौहार हिंदुओं का त्यौहार है। यह हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला बहुत बड़ा त्यौहार है। होली के इस त्यौहार को रंगो के त्योहार के नाम से भी जाना जाता है। होली एक ऐसा त्यौहार है जिसे हर धर्म के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ मनाते हैं। यह एक रंग बिरंगा त्यौहार है।

प्यार भरा यह त्यौहार हर धर्म, संप्रदाय, जाति के बंधन को खोल कर भाईचारे का संदेश देता है। इस त्यौहार को प्रेम का त्यौहार भी कहा जाता है। क्योंकि इस दिन सभी लोग अपने गिले-शिकवे भुलाकर दोस्ती कर लेते हैं और और एक दूसरे को रंग लगाकर पूरे हर्षोल्लास से इस त्योहार को मनाते हैं।

होली त्यौहार को फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। भारत में नंदगांव, वृंदावन और बरसाने की होली बहुत अधिक प्रसिद्ध है। इसे देखने के लिए विदेशों से भी पर्यटक आते हैं। यह एक प्राचीन त्योहार है इसलिए होली के साथ अनेक कथाएं जुड़ी है। होली मनाने की एक रात पहले होली को जलाया जाता है।

इसके पीछे भी एक पौराणिक कथा है। बहुत समय पहले एक हिरण्यकश्यप नामक असुर राजा था। उसकी बहन होलिका और उसका बेटा प्रह्लाद थे। प्रह्लाद असुर जाति में जन्म लेने पर भी बहुत शांत स्वभाव का था। वह भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था।

जबकि उसके पिता चाहते थे की प्रह्लाद के सहित सभी उसकी पूजा करें। लेकिन भक्त प्रह्लाद को यह बात सही नहीं लगी और वह भगवान विष्णु की पूजा करता रहा। इससे नाराज होकर उसके पिता ने उसको आग से जला कर मारने की योजना बनाई।

उन्होंने अपने बहन होलिका से प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ कर मारने के लिए कहा। क्योंकि होलिका को भगवान से यह वरदान था कि उसे आग जला नहीं सकेगी। इसलिए अपने भाई की बात मान होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गई।

लेकिन प्रह्लाद भगवान विष्णु का नाम जपते हुए उस आग से बच गया। प्रह्लाद को उस आग से कोई भी नुकसान नहीं हुआ। बल्कि होलीका ही इस आग में जलकर खाक हो गई। इसी कथा से होली उत्सव का जन्म हुआ।

तभी से इसे बुराई पर अच्छाई की जीत माना गया और होली त्यौहार का उदय हुआ। इसलिए आज लोग जगह-जगह भारत और कुछ देश जैसे नेपाल में होली के दिन होलिका दहन करते हैं।

होलिका दहन करने के लिए घास फूस और सूखी लकड़ी को इकट्ठा किया जाता है। और साथ ही में गोबर की बहुत सारे कड़े इस्तेमाल में लिए जाते हैं। होलिका दहन करने से पहले सभी महिलाएं होली की पूजा करती है। और उसके बाद होलिका दहन किया जाता है।

होली का दूसरा दिन जिसे रंग पंचमी कहते हैं। यह दिन मौज मस्ती का दिन होता है। इसे धुलेंडी भी कहते हैं। इस दिन लोग सुबह उठकर रंगों को लेकर अपने नाते रिश्तेदारों और मित्रों के घर जाते हैं और उनके साथ जमकर होली खेलते हैं।

होली का यह दूसरा दिन बच्चों के लिए काफी महत्व रखता है। बच्चे होली के कुछ दिन पहले ही बाजार से अपने लिए तरह-तरह की पिचकारीया और गुब्बारे लाते हैं। बच्चे गुब्बारे और पिचकारी से अपने मित्रों के साथ होली का आनंद उठाते हैं। इस दिन सभी लोग एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं और एक दूसरे को रंग बिरंगी रंगों से रंग देते हैं।

पहले की होली में पर्यावरण से बनाए हुए रंग इस्तेमाल किए जाते थे। लेकिन आज के रंगों में काफी केमिकल्स की मिलावट की जाती है। जो त्वचा के लिए नुकसान दाय होते हैं। इस रंगों के प्यार भरे त्यौहार में हमें रासायनिक और नशीली पदार्थ से दूर रहना चाहिए।

बच्चों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह ऐसे रंगों का इस्तेमाल ना करें जो उनके लिए हानिकारक हो। इसलिए बच्चों को बड़ों की निगरानी में ही होली खेलनी चाहिए।

बच्चों को हो सके तो गुब्बारों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे किसी को हानि भी हो सकती हैं। होली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की विजय का एक प्रतीक माना जाता है। इस त्यौहार से सीख लेते हुए हमें भी अपनी बुराइयों को छोड़ते हुए अच्छाई को अपनाना चाहिए।

इस त्यौहार से हमें एक और सीख सीखने को मिलती है कि कभी भी हमें अहंकार नहीं करना चाहिए क्योंकि अहंकार हमारे सोचने समझने की शक्ति को खत्म कर देता है।


Holi Essay in Hindi


दोस्तों, भारत त्योहारों का देश है। भारत में हर साल कई त्योहार मनाए जाते हैं। होली उन्हीं में से एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। होली यह हिंदुओं का त्यौहार है। होली को सर्दियों के मौसम के अंत में और वसंत ऋतु की शुरुआत में मनाया जाता है।

यह बहुत खुशी और उत्साह का एक रंगीन त्यौहार है। होली रंगों का त्योहार है। होली को हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

होली एक महत्वपूर्ण हिंदुओं का त्यौहार है। जिसका धार्मिक और पौराणिक महत्व है। होली त्योहार को बुराई पर सच्चाई के विजय के रूप में मनाया जाता है। होली त्योहार के पीछे एक पौराणिक कथा है।

प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक असूर राजा था। जिसने ब्रह्मा से वरदान पाकर मृत्यु पर विजय प्राप्त कर ली थी। राजा हिरण्यकश्यप भगवान पर विश्वास नहीं करता था। उसे अपने शक्तियों पर बहुत घमंड था। जिस वजह से वह यह समझने लगा कि उसे कोई हरा नहीं सकता।

उसे एक पुत्र हुआ जिसका नाम प्रह्लाद था। प्रह्लाद भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था। तो दूसरी तरफ प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु के विरोधी थे। हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने से रोका। और जब प्रह्लाद नहीं माना तो उन्होंने प्रह्लाद को मारने का प्रयास करना शुरू कर दिया।

राजा हिरण्यकश्यप को एक बहन थी जिसका नाम होलीका था। होलिका को भगवान से एक वरदान मिला था कि कोई आग उसे जला नहीं पाएगी। प्रह्लाद को मारने के लिए कहीं तरीके अपनाने के बाद हिरण्यकश्यप ने अपने बहन से मदद मांगी।

होलिका अपनी भाई हिरण्यकश्यप की मदद करने के लिए तैयार हो गई। और होलिका को प्रह्लाद के साथ चिता पर बैठा दिया गया। लेकिन भगवान विष्णु के आशीर्वाद की वजह से प्रह्लाद को कोई नुकसान नहीं हुआ। उलट होलीका उस चिता में जलकर राख हो गई। और तभी से होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन हर साल मनाया जाता है।

होलिका दहन होने के बाद दूसरे दिन सुबह लोग रंग बिरंगी होली को एक साथ मनाने के लिए एक जगह इकट्ठा हो जाते हैं। होलिका दहन के दूसरे दिन सभी लोग एक दूसरे के घर जाकर रंग गुलाल लगाते हैं। और साथ ही में अच्छे पकवानों का आनंद लेते हैं।

जैसे की होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन लोग अपने बीच के सारे मतभेदों को भूल जाते हैं। और टूटे रिश्तो को बनाकर खुशी खुशी एक होते हैं।

होली को एक दूसरे पर रंग उड़ा कर गुलाल लगाकर और एक दूसरे को गले लगाकर मनाया जाता है। होली के दिन होली के गाने गाकर अपने परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों के साथ मिलकर संगीत पर नाच गाकर सभी लोग होली को मनाते हैं। इस दिन दोपहर के बाद लोग नमस्कार करने के लिए एक दूसरे के घर जाते हैं।

होली ऐसा त्यौहार है जो जगह और संस्कृति के अनुसार अलग तरह से मनाया जाता है। कुछ जगह पर होली के दिन सफेद रंग की पोशाक पहनकर खेलने की परंपरा होती है। और उसी दिन शाम को एक दूसरे को अपना प्यार, स्नेह और भाईचारे को दिखाने के लिए एक दूसरे को गले लगाते हैं।

होली के दिन को कुछ लोग गलत तरीके से मनाते हैं। वह लोग इस दिन शराब पीते हैं और अन्य लोगों के चेहरों पर कीचड़ का इस्तेमाल करते हैं जो सही बात नहीं है।

हम सब को स्वच्छ होली खेलनी चाहिए। हमें लोगों को इन गतिविधियों को छोड़ने और त्योहार को सही भावना से मनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। क्योंकि होली है एक रंगों का त्योहार है। यह दिन खुशीया बांटने के लिए है ना कि शराब पीकर लोगों के साथ बुरा बर्ताव करने के लिए।


Short Essay on Holi In Hindi


होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला हिंदुओं का पवित्र त्योहार है। होली प्रत्येक वर्ष पूरे भारतवर्ष में बडे ही धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस त्यौहार को रंगो के त्योहार के नाम से भी जाना जाता है।

होली एक ऐसा त्यौहार है जिसे हर धर्म के लोग बड़े ही उत्साह के साथ मनाते हैं। रंगों से भरा यह त्यौहार धर्म, संप्रदाय, जाति के बंधन को खोलकर भाईचारे का संदेश देता है।

रंगों का त्योहार कहा जाने वाला यह त्यौहार पारंपरिक रूप से 2 दिन मनाया जाता है। होली के पहले दिन होली को जलाया जाता है। जिसको होलिका दहन करते हैं। और दूसरे दिन को धुलेंडी कहां जाता है।

होली यह एक प्रेम का त्यौहार है। क्योंकि इस दिन सभी लोग अपने गिले-शिकवे भुलाकर दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं और एक दूसरे को रंग लगाकर होली के इस त्यौहार को पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं।

होली भारत का बहुत ही प्रसिद्ध त्योहार है। जिसे देखने के लिए और मनाने के लिए विदेशों से भी पर्यटक आते हैं। होली त्यौहार को मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा है।

बहुत साल पहले एक राजा था। जिसका नाम हिरण्यकश्यप था और वह एक असूल था। उसकी एक बहन थी जिसका नाम होलीका था। और एक प्रल्हाद नामक बेटा था। प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप ने प्राचीन साल में अपनी शक्ति से मृत्यु लोक पर विजय प्राप्त कर ली थी। उसके भय के कारण सभी लोग उसे ईश्वर के रूप में पूजने लग गए थे।

लेकिन प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था जो हिरण्यकश्यप को रास नहीं आया। इसलिए प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने से रोकने के लिए हिरण्यकश्यप ने बहुत प्रयास किए लेकिन वह असफल रहा।

इसलिए उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को गोद मैं बिठाकर चिता पर बैठ जाए। होलिका को वरदान था कि उसे अग्नि से कोई हानि नहीं होगी। जिसका फायदा उठाकर हिरण्यकश्यप प्रह्लाद को मारना चाहता था। लेकिन भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद को इस अग्नि से कोई हानि नहीं हुई।

उल्टा हिरण्यकश्यप की बहन होलिका उस अग्नि में जलकर राख हो गई। और तभी से उस दिन को होलिका दहन मनाया जाता है। यह वही दिन है जिस दिन अच्छाई की बुराई पर जीत हुई और होली त्यौहार का उदय हुआ।

होली त्यौहार के पहले दिन होलिका दहन करने के लिए घास फूस और सूखी लकड़ियों को इकट्ठा किया जाता है। और रात को होली के पहले दिन होलीका दहन करने से पहले सभी महिलाएं होली की पूजा करते हैं। और उसके बाद होलीका दहन कर दिया जाता है।

होली का दूसरा दिन बहुत मौज मस्ती और मजेदार होता है। इस दिन को सभी बच्चे सुबह उठकर पिचकारी में रंग भर कर होली का आनंद लेते हैं। इस दिन सभी एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाते है। और एक दूसरे को रंग बिरंगे रंगों से रंग देते हैं।

बच्चों के लिए तो यह त्यौहार विशेष महत्व रखता है। क्योंकि इस दिन बच्चे रंग के गुब्बारे और पिचकारीओं से अपने दोस्तों के साथ धूमधाम से होली का आनंद लेते हैं। होली सबका चहेता त्यौहार है, इस दिन सभी अपने मतभेद भुलाकर दोस्ती की नई शुरुआत करते हैं। और अपने अंदर की बुराई पर विजय प्राप्त करते हैं।


Paragraph On Holi in Hindi


होली हमारे देश के प्रमुख त्योहारों में से एक है। होली यह एक हिंदू धर्म का त्यौहार है। लेकिन इस त्यौहार को सभी धर्म के लोग मिल जुल कर मनाते हैं। इस त्यौहार को प्रत्येक वर्ष मार्च के महीने में मनाया जाता है। जिसे हिंदी कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन का महीना कहते हैं।

यह होली का त्यौहार भारत देश के हर एक राज्य में मनाया जाता है। यह एक रंगो का त्यौहार है जिसमें लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं। होली के कुछ दिन पहले लोग बाजार से रंग और अबीर की खरीदी करते हैं। साथ ही में बच्चों के लिए गुब्बारे और पिचकारिया भी खरीदते हैं। होली के कुछ दिन पहले से ही बाजारों में चहल-पहल बढ़ जाती है। इस होली के त्यौहार में बच्चों में अलग सा उत्साह होता है।

बच्चे होली के दिन खरीदी हुई पिचकारी से एक दूसरे पर रंग डालते हैं। और अपने दोस्तों के साथ होली का आनंद लेते हैं। रंग पंचमी के 1 दिन पहले रात में होलिका दहन किया जाता है।

होली का दहन में सुखी लकड़ी घास फूस इत्यादि को जलाया जाता है। इसके लिए लोग अपने इच्छा से चंदा देते हैं। होलिका दहन सार्वजनिक तरीके से मनाया जाता है। सभी लोग इसमें हिस्सा लेते हैं। चंदे से आए हुए पैसे से होलिका के लिए सूखी लकड़ी और अन्य सामग्री को खरीदा जाता है।

होलिका दहन के पीछे एक पौराणिक कथा है। जो बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाती है। होली को पारंपरिक तौर पर 2 दिन मनाया जाता है। पहले दिन होलिका दहन किया जाता है और दूसरे दिन रंगपंचमी मनाई जाती है। जिसे धुलेंडी भी कहा जाता है।

होली के दिन सभी घरों में मिठाइयां और अन्य कई प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। इस दिन बच्चे और युवा सभी एक दूसरे को रंग लगाकर खुशियां मनाते हैं। होली के इस दिन लोग एक साथ इकट्ठा होकर एक टोली बनाते हैं। यह टोली अपने साथ ढोल ताशे लेकर घूमते हैं और एक दूसरे को रंग व अबीर लगाते हैं।


Very Short Essay On Holi in Hindi


होली एक रंगों का त्योहार है। जो पूरे भारत में हर वर्ष हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। होली त्यौहार को फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली यह प्यार भरे रंगों से सजा त्यौहार है जो भाईचारे का संदेश देता है।

इस दिन लोग अपने गिले-शिकवे भुलाकर एक दूसरे को रंग लगाते हैं और अपने बीच के मतभेदों को खत्म करके दोस्ती की एक नई शुरुआत करते हैं।

फाल्गुन की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है, शाम को लोग इकट्ठा होकर लकड़ी और घास का ढेर बनाते हैं। परंपरागत पद्धति से होली की पूजा की जाती है और रात में होलिका दहन का रिवाज संपन्न किया जाता है।

होलिका दहन के अगली सुबह लोग एक दूसरे पर रंगों की बौछार करते हैं, बच्चे गुब्बारों और पिचकारी में रंग भर कर एक दूसरे पर फेकते हैं। इस दिन घरों में स्वादिष्ट पकवान और मिठाइयां बनाई जाती है।

होली यह एक ऐसा त्यौहार है जो बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है। होली को सभी धर्म के लोग बड़े ही खुशी से मनाते हैं। यहां तक कि परदेसी लोग भी इस त्यौहार को मनाने के लिए उत्सुक रहते हैं। सभी लोग अपनी उलझन और परेशानियों को बुलाकर इस पावन त्यौहार को आनंद और उत्साह से मनाते हैं।


तो दोस्तो यह थी कुछ अच्छे निबंध जो आप अपने स्कूल या कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए लिख सकते हैं। अगर आपको हमारा होली पर निबंध (Holi essay in Hindi) पसंद आया हो तो आप उसे अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं। धन्यवाद!

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